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Monday, 27 June 2016

♥ भारतीय पीनल कोड में धाराओ का मतलब ♥


धारा 307 = हत्या की कोशिश
धारा 302 =हत्या का दंड
धारा 376 = बलात्कार
धारा 395 = डकैती
धारा 377= अप्राकृतिक कृत्य
धारा 396= डकैती के दौरान हत्या
धारा 120= षडयंत्र रचना
धारा 365= अपहरण
धारा 201= सबूत मिटाना
धारा 34= सामान आशय
धारा 412= छीनाझपटी
धारा 378= चोरी
धारा 141=विधिविरुद्ध जमाव
धारा 191= मिथ्यासाक्ष्य देना
धारा 300= हत्या करना
धारा 309= आत्महत्या की कोशिश
धारा 310= ठगी करना
धारा 312= गर्भपात करना
धारा 351= हमला करना
धारा 354= स्त्री लज्जाभंग
धारा 362= अपहरण
धारा 415= छल करना
धारा 445= गृहभेदंन
धारा 494= पति/पत्नी के जीवनकाल में पुनःविवाह
धारा 499= मानहानि
धारा 511= आजीवन कारावास से दंडनीय अपराधों को करने के प्रयत्न के लिए दंड।

       ♠ भारतीय दंड संहिता

                        या

        भारतीय दंड विधान 

                        या

                    (I. P. C)

      •••••   प्रस्तावना  •••••

धारा - 1 =संहिता का नाम और विस्तार।

साधारण स्पष्टीकरण

धारा - 21= लोक सेवक।

धारा - 34 = सामान आशय।

धारा - 52 = सद् भावपूर्ण।

धारा - 52. क = संश्रय।

साधारण अपवाद

धारा -  76 तथ्य की भूल के कारण अपराध (विधि द्वारा आबद्ध )।

धारा - 79 = तथ्य की भूल के कारण अपराध (विधि द्वारा न्यायनुमतः)।

धारा - 81 =यदि बड़ी हानि रोकने के लिए छोटी हानि करना अपराध नही।

धारा - 82 = 7 वर्ष से कम शिशु का अपराध नही।

धारा -  83 = 7-12 वर्ष के बीच अपराध नही (यदि अपरिपक्व हो)।

धारा - 84 = पागल द्वारा अपराध       नही है।

धारा - 85 =मद्यपान में अपराध नही (इच्छा के विरुद्ध मद्यपान )।

धारा - 86 = मद्यपान में अपराध (इच्छा से, बिना ज्ञान के )।

प्राइवेट  प्रतिरक्षा के अधिकार

धारा - 96 = आत्मरक्षा में अपराध नही है।

धारा - 97 = अपना व दुसरे के शरीर, चोरी, लूट व रिष्टी में आत्मरक्षा का अधिकार।

धारा -  98 = पागल व बच्चों के   हमले पर आत्मरक्षा का अधिकार।

धारा - 99 = आत्मरक्षा के अधिकार के बन्धन।

धारा - 100 = आत्मरक्षा में मृत्यु कारित करना ( 1. मृत्यु होने की आशंका हो। 2. गम्भीर चोट की आशंका हो 3. बलात्कार के हमले पर  4. प्रकृति के विरुद्ध काम - तृष्णा करने पर 5.व्यपहरन में 6. कहीं पर बंद हो और वहा से छूटने के लिए  7. अम्लीय हमले पर )।

धारा - 101 = आत्मरक्षा में मृत्यु से भिन्न कोई चोट मारने का अधिकार।

धारा - 102 = आत्मरक्षा का अधिकार का प्रारंभ और बना रहना।

धारा - 103 = सम्पति की प्रतिरक्षा में मृत्युकारित करने का अधिकार (1.रात्री ग्रह भेदन 2. मानव के रहने वाले जगह पर रिष्टी(आग लगाना) 3. ग्रह-अतिचार में )।

धारा - 104 = आत्मरक्षा में मृत्यु से भिन्न कोई चोट पहुंचाने का अधिकार (सम्पत्ति के लिए )।

धारा - 106 = आत्मरक्षा में निर्दोष व्यक्ति को हानि पहुचाने का अधिकार।

आपराध षडयंत्र

धारा - 120.क = आपराधिक षड़यंत्र की परिभाषा (दो या दो से अधिक लोग रचे )।

धारा -  120.ख = आपराधिक षड्यंत्र का दण्ड।

सरकार के विरुद्ध अपराध

धारा - 121 = सरकार के विरुद्ध युध्द, प्रयत्न, दुष्प्रेरण करना।

धारा - 121.क = धारा - 121 का षड़यंत्र करना।

धारा - 122 = सरकार के विरुद्ध करने के आशय से युद्ध के सामान इकठ्ठा करना।

धारा -  123 = युध्द की होने वाली घटना को सफल बनाने के आशय से छिपाना।

धारा - 124 = किसी विधिपूर्वक शक्ति का प्रयोग करने के लिए विवश या प्रयोग करने या अवरोध करने के आशय से राष्ट्रपति, राज्यपाल आदि पर हमला।

धारा - 124.क = राजद्रोह।

लोक अशांति के अपराध

धारा - 141 = विधि विरुद्ध जमाव (पाँच या ज्यादा )।

धारा - 142 = विधि विरुद्ध जमाव का सदस्य होना।

धारा -  143 = दण्ड।

धारा - 144 = घातक हत्यार लेकर जमाव में सम्मिलित होना।

धारा - 149 = विधि विरुद्ध जमाव का सदस्य होना (सामान उद्देश्य हो)।

धारा - 151 = पाँच या से अधिक लोगों को बिखर जाने का आदेश देने के बाद भी बना रहना।

धारा - 153 = किसी धर्म, वर्ग, भाषा, स्थान, या समूह के आधार पर सौहार्द बिगाड़ने का कार्य करना।

धारा - 159 = दंगा (दो या अधिक लोग लडकर लोक शान्ति में विध्न डाले। )।

धारा - 160 = दगें का दण्ड।

लोक सेवको के अपराध

धारा - 166 = लोक सेवक सरकारी काम न करें किसी को नुकसान पहुंचाने के आशय से।

धारा - 166.क = कोई लोक जानते हुए सरकारी कार्य की अपेक्षा करना।

धारा - 166.ख = किसी प्राइवेट या सरकारी अस्पताल में पीड़ित का उपचार न करना (अपराधी केवल संस्थान का मुख्य होगा )।

धारा - 177 = जो कोई किसी लोक सेवक को ऐसे लोक सेवक को जो आबद्ध होते झुठी सुचना दे।

लोक सेवक के प्राधिकार की अवमानना

धारा - 182 = कोई व्यक्ति लोक सेवक को झुठी सुचना दे दुसरे को क्षति पहुंचाने के लिए।

धारा - 186 = लोक सेवक के सरकारी कार्य में बाधा डालना।

धारा - 187 = यदि कोई लोक सेवक के द्वारा सहायता मांगने पर न दे और वह आबद्ध हो।

धारा - 188 = कोई व्यक्ति लोक सेवक की आदेश का पालन न करें जब वह काम विधिपूर्वक हो।

झूठे साक्ष्य का अपराध

धारा - 201 = अपराध के साक्ष्य को छिपाना अपराधी को बचाने के आशय से।

धारा - 212 = अपराधी को अपराध करने के बाद बचाने के लिए संश्रय देना, जानते हुए। (पति-पत्नी पर लागू नहीं )।

धारा - 216 = अपराधी को संश्रय देना। जब पकड़ने का आदेश या दोष सिद्ध हो।(पति-पत्नी पर लागू नहीं )।

धारा-216.क = लुटेरे या डाकुओं को संश्रय जानकर देना (पति-पत्नी पर  लागू नहीं )।

धारा - 223 = लोक सेवक की लापरवाही से अभिरक्षा में से अपराधी का भाग जाना।

धारा - 224 = अपराधी स्वयं पकडे़ जाने का प्रतिरोध करना, बाधा डालना, निकल भागने का प्रयास करना।

धारा - 225 = अपराधी का कोई अन्य लोगों द्वारा पकडे़ जाने का प्रतिरोध करना, बाधा डालना, निकल भागने का प्रयास करना।

लोक स्वास्थ्य, सुविधा, सदाचार पर अपराध

धारा -  268 = लोक न्युन्सेस( कोई व्यक्ति ऐसा कार्य करे जिससे लोक सेवक, जनसाधारण को या सम्पति को संकट, क्षोभ, क्षति, बाधा करें)।

धारा - 269 = ऐसा विधि विरुद्ध या लापरवाही से संक्रमण फैलाना।

धारा -  268 = लोक न्युन्सेस( कोई व्यक्ति ऐसा कार्य करे जिससे लोक सेवक, जनसाधारण को या सम्पति को संकट, क्षोभ, क्षति, बाधा करें)।

धारा - 269 = ऐसा विधि विरुद्ध या लापरवाही से संक्रमण फैलाना।

धारा - 272 = खाद्य पदार्थों में विक्रय के लिए अपमिश्रण मिलाना। जानते हुए।

धारा - 277 = किसी लोक (सार्वजनिक ) जल स्त्रोत को गंदा जानते हुए करना।

धारा - 278 = वायु मण्डल को दुषित करना जानते हुए।

धारा - 292 = अश्लील सामग्री का विक्रय, आयात, निर्यात या किराए पर देना (लोकहित में, ऐतिहासिक, धार्मिक, स्मारक या पुरातत्व में लागू नही)।

धारा - 293 = तरूण व्यक्ति (-20 वर्ष ) तक अश्लील सामग्री किसी भी तरह पहुंचाना।

   धर्म से संबंधित अपराध

धारा - 295 = किसी धर्म के लोगों का अपमान के आशय से पुजा के स्थान को क्षतिग्रस्त या अपवित्र करना।

धारा - 295.क = द्वेषपूर्ण कार्य जो किसी धर्म के धार्मिक विश्वासों का अपमान करके उसकी धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आशय किया हो (लेख से, चित्र से, सकेंत से आदि )।

मानव शरीर पर प्रभाव   डालने  वाले अपराध

धारा - 299 = आपराधिक मानव वध करना।

धारा - 300 = हत्या (murder )।
धारा - 301 = जिस व्यक्ति को  मारने का इरादा था लेकिन दुसरे को मार दिया। यह हत्या होगी।

धारा - 302 = हत्या का दण्ड (मृत्यु दण्ड या कठोर या सादा अजीवन कारावास और जुर्माना। )।

धारा - 303 = अजीवन कारावास सिद्ध दोष, पुनः हत्या करना। मृत्यु दण्ड।

धारा - 304 = हत्या की कोटि में न आने वाले अपराधिक मानव वध।

धारा - 304. क = लापरवाही (उपेक्षा ) से मृत्यु कारित करना। (कठोर या सादा कारावास दो वर्ष या जुर्माना या दोनों )।

धारा - 304. ख = दहेज हत्या (विवाह के सात साल के पहले )।

धारा - 306 = कोई व्यक्ति आत्महत्या करे तो जो ऐसी आत्महत्या का दुष्प्रेरण करे, उकसाये।

धारा - 307 = मृत्यु कारित करने के आशय से मृत्यु कारित करने का असफल प्रयास करना। (302 का असफल होना )।

धारा - 308 = 304 का असफल प्रयास करना।

चोट पहुंचाने के अपराध

धारा - 319 = किसी व्यक्ति को साधारण क्षति  या चोट पहुंचाने।

धारा - 320 = किसी व्यक्ति को गम्भीर चोट पहुंचाना (1.पुंसत्वहर  2.दृष्टि का स्थायी विच्छेद करना  3.श्रवण शक्ति का स्थायी विच्छेद करना  4. किसी अंग या जोड़ का विच्छेद करना 5.जो चोट बीस दिन तक असहनीय हो 6.किसी अंग का स्थायी हासिल 7. सिर में गंभीर चोट ) आदि।

धारा - 321 = स्वेच्छा से उपहति (चोट) पहुंचाना।

धारा - 322 = स्वेच्छा से घोर उपहति (गम्भीर चोट ) पहुंचाना।

धारा - 323 = 321 का दण्ड (एक वर्ष या जुर्माना(-1000 ) या दोनों )।

धारा - 324 = खतरनाक हत्यार या आयुद्ध द्वारा स्वेच्छा से चोट पहुंचाना।

धारा - 325 = 322 का दण्ड(सात वर्ष और जुर्माना )।

धारा - 326 = खतरनाक हत्यार या आयुद्ध द्वारा स्वेच्छा से गम्भीर चोट पहुंचाना।

धारा - 326.क = अम्ल आदि का प्रयोग करके आशिंक या गम्भीर चोट स्वेच्छा से पहुंचाना।

धारा - 326.ख = अम्ल आदि का प्रयोग करके स्वेच्छा से चोट पहुंचाने का प्रयास करना।

धारा - 330 = किसी को किसी भी बात पर जबरदस्ती संस्वीकृति (कुबूल ) कराना।

धारा - 332 = कोई लोक सेवक किसी को भी अपनी ड्यूटी पर चोट स्वेच्छा से चोट पहुंचाता है।

धारा - 333 = कोई लोक सेवक किसी को भी अपनी ड्यूटी पर गम्भीर चोट पहुंचाता है।

धारा - 339 = सदोष अवरोधे( किसी मार्ग में जाने से रोकना जहां अधिकार हो स्वेच्छा से)

धारा - 340 = किसी व्यक्ति को बिना सहमति के बिना बल के या बल से रोक कर रखे।

धारा - 341 = धारा - 339 का दण्ड (एक महीने का सादा कारावास या 500 रु०तक का जुर्माना या दोनों )।

धारा - 342 = धारा - 340 का दण्ड (सादा या कठोर एक वर्ष  का कारावास या 1000 र० तक का जुर्माना या दोनों )।

धारा - 350 =  किसी व्यक्ति पर उसकी बिना सहमति के व अपनी स्वेच्छा से बल प्रयोग करना (1.धक्का देना 2 . थप्पड़ मारना 2.पत्थर मारना  आदि )।

धारा - 351 = हमला करना .
क्रान्तिकारी अधिवक्ता


Sunday, 26 June 2016

♥ વનસ્પતિ વિજ્ઞાન ♥






















♥ IMP GK FOR COMPETITIVE EXAMS ♥

1. एक भारतीय नोट पर - 17 भाषाएँ लिखी होती हैं।

2. कपालेश्वर महादेव मन्दिर शिव जी का एक मात्र मन्दिर है - जहाँ उनके साथ नन्दी नहीं हैं।

3. मानव द्वारा सर्वप्रथम प्रयुक्त अनाज चावल था l

4. 1920 के भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में असहयोग प्रस्ताव सी आर दास ने पेश किया था l

5. भारत में तम्बाकू के प्रचलन का श्रेय पुर्तग़ालियों को है l

6. स्टानले कप किस खेल आइस हॉकी से संबंधित है l

7. भारत में अति सघन वनों का सर्वाधिक क्षेत्र अरुणाचल प्रदेश में पाया जाता है।

8. भारत दुनिया का एक मात्र ऐसा देश है - जहाँ शेर और चीता दोनों पाये जाते हैं।

9. भारत का राष्ट्रगान सब्से पहले इंग्लैंड मे - सन 1911 मे गाया गया था।

10.विश्व का सबसे बड़ा मन्दिर अंकोरवाट मन्दिर कम्बोडिया मे है।

11. आई. ए. एस. पास करने वाले प्रथम भारतीय सत्येन्द्र नाथ टैगोर थे, जो गुरु रविन्द्र नाथ टैगोर के भाई थे।

12. पोलर भालू एक घन्टे में 25 मील तक दौड़ते हैं, और 6 फ़ीट तक कूद सकते हैं।

13. एक सैलफ़िश 109 किमी० प्रति घन्टे की रफ़्तार से तैर सकती है, अतः यह सबसे तेज़ तैरने वाला जीव है।

14..सन 1885 सबसे पहली मोटर-कार का निर्माण कार्ल बेन्ज़ (जर्मनी) ने किया था।

15.. मौर्य वंश सबसे प्राचीन राजवंश है l
           

♥ प्रमुख झीलें ♥


डल झील - जम्मू-कश्मीर
वुलर झील - जम्मू-कश्मीर
बैरिनग झील - जम्मू-कश्मीर
नागिन झील - जम्मू- कश्मीर
शेषनाग झील - जम्मू-कश्मीर
अनंतनाग झील - जम्मू-कश्मीर
राजसमंद झील - राजस्थान
पिछौला झील - राजस्थान
सांभर झील - राजस्थान
जयसमंद झील - राजस्थान
फतेह्सगर झील - राजस्थान
सात ताल झील- उत्तराखंड
नैनीताल झील - उत्तराखंड
रकास ताल झील -उत्तराखंड
मालाताल झील - उत्तराखंड
डिड्वॅना झील - राजस्थान
देवताल झील - उत्तराखंड
हुस्सैन सागर झील - आंध्रप्रदेश
पुलीकट झील - तमिलनाडु
लोकटक झील - मणिपुर
छिलका झील - ऊडिशा
        

♥ દુનિયાની સૌથી ઊંચી આઉટડોર લિફ્ટ્સ ♥



♥ ટચ સ્ક્રીન કેવી રીતે કામ કરે છે? ♥


♥ આફ્રિકન સર્વલ બિલાડી ♥


♥ સ્પાઇડર મન્કી ♥


♥ વિલિયમ શેક્સપિયર ♥


Saturday, 25 June 2016

♥ EMAILING KNOWLEDGE POWER BOOK ♥

HTAT BOOK नोलेज पावर नी भव्य सफलता बाद आ फाईल आप सौ मित्रो ने तमाम परीक्षा माटे उपयोगी थई रहे एटला माटे तमे तमारा फ्रेन्ड सर्कल / विधार्थी मित्रो /शिक्षक मित्रो ने  मोकली तमाम  परीक्षा नी तैयारी मां सहाय रुप बनी तमारु योगदान आपो एवी नम्र अरज छे.

CREATED BY V.B.PARMAR

»»» आ 10.6 MB NI FILE HTAT /TET /TAT /PSI /GPSC & GUJARAT GAUN SEVA BIN SACHIVALAY  CLERK MATE KHUB IMPORTANT BANI REHSHE.

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♥ पद्मनाभ स्वामी मंदिर ♥

केरला में अंगिनत मंदिर है। उनकी अनोखी कारीगरी उनको एक संम्मान देती है और हर मंदिर के पीछे एक कहानी है। पद्मनाभस्वामी मंदिर – तिरुवनंतपुरम का उन में से एक है। इस मंदिर में सैकड़ो श्रद्धालु हर साल आकर्शित होते है। यह मंदिर भारत देश का सबसे पुराने मंदिरों में से एक है और साथ ही सबसे अमिर मंदिरों में से भी एक है।

पद्मनाभस्वामी मंदिर का इतिहास 

पद्मनाभस्वामी मंदिर भारत के केरल राज्य के तिरुवनन्तपुरम में स्थित है।

इस मंदिर के निर्माण में बहोत सी शैली का मिश्रण किया गया है। देशी केरला शैली और द्रविड़ शैली का संयुक्त रूप से इस्तेमाल इस मंदिर का निर्माण किया गया है।

यह तमिलनाडु के पास में स्थित है।

इसकी उंची दीवारे और 16 वी सदी में बनी है जो मन को लुभाती है। अन्न्तपुरम मंदिर में दिखाई देता है। जो की अदिकेश्वा पेरूमल मंदिर कन्न्याकुमारी में है दुनिया का सबसे धनि मंदिर में से एक है। अपार धन संपत्ति सोना चांदी हीरे जवाहरात के लिए इस मंदिर ने दुनिया में इतिहास रचा है।

मंदिर के गर्भ गृह में भगवान विष्णु की विशाल मूर्ति है। इस प्रतिमा में भगवान विष्णु शेष नाग पर विराजमान है। यहाँ पर भगवान पद्मनाभस्वामी त्रावनकोर के राज परिवार के शासक थे। उस समय शासन कर रहे त्रवंकोर के महाराज मूलं थिरूनल रोमा वर्मा श्री पद्मनाभा दाता के रूप में मंदिर के ट्रस्टी थे वे भगवान पद्मनाभा के दास थे। इस मंदिर में हिन्दुओ को ही प्रवेश मिलता है। प्रवेश के लिए विशेष वेशभूषा है।


Padmanabhaswamy Temple में विभिन्न हिन्दू मूल के ग्रंथ ब्रह्मा पुरना, मत्स्य पुरना, वरः पुरना, स्कन्द पुरना, पद्म पुरना, वायु पुरना, भगवत पुरना और महाभारत का उल्लेख मिलता है।

यह मंदिर तमिल साहित्य के 500 बी.सी. से 300 ए.डी. के बिच के संगम दौर का है। कई इतिहासकार इसें स्वर्ण मंदिर कहते है। अपनी अथाह धन संपत्ति के लिए यह मंदिर अकल्पनीय है।

पद्मनाभ स्वामी मंदिर विष्णु-भक्तों की महत्वपूर्ण आराधना-स्थली है। मंदिर की संरचना में सुधार कार्य किए गए जाते रहे हैं। उदाहरणार्थ 1733 ई. में इस मंदिर का पुनर्निर्माण त्रावनकोर के महाराजा मार्तड वर्मा ने करवाया था। 

9 वी सदी के तमिल साहित्य व कविताओ और संत कवी नाम्माल्वर के अनुसार यह मंदिर और साथ ही शहर में सोने की दीवारे है। कुछ स्थानों में साथ ही मंदिर और शहर के अंदरूनी भागो को देख कर एसा प्रतीत होता है की जैसे स्वर्ग में आ गए हो।

मध्यकालीन तमिल साहित्य और सिधान्तो तमिल अलवर संत (6 वी 9 वी सदी) ने कहा यह मंदिर प्रमुख 108 धार्मिक स्थलों में से एक है और इसके दिव्य प्रबंध की महिमा देखते ही बंती है।

इस मंदिर के दिव्य प्रबंध की महिमा मलाई नाडू के 13 धार्मिक स्थलों में से एक है। 8 वी सदी के संत कवी नाम्माल्वर पद्मनाभा की महिमा गाते थे। अन्न्त्पुरम मंदिर कासरगोड का विश्वास सिर्फ मंदिर के मूलास्थानाम में था। पंडित विल्वामंगालात्हू स्वमियर जो अनंथापुरम मंदिर के पास रहते थे कासरगोड जिल्हे में उन्होंने विष्णु जी की खुप प्रार्थना की और उनके दर्शन प्राप्त किए। उनका मन ना था की विष्णुजी एक छोटे नटखट बालक के रूप में आए थे। और उस बालक ने पूजा की मूर्ति को दूषित कर दिया था। इस से पंडित जी गुस्सा हो गए और बालक का पीछा करने गए परंतु वह बालक गायब हो चूका था। बहोत खोज के बाद जब वो अरबी समुद्र के तट पर पहुचे तो उन्होंने एक पुलाया महिला की आवाज सुनी जो अपने पुत्र से कह रही थी की वह उसे अनंथान्कदु में फेक देंगी। उसी क्षण स्वामी ने अनंथान्कदु शब्द सुने तो वे आनंदित हो गए। फिर स्वामी ने उस महिला से पूछ कर अनंथान्कदु की ओर प्रस्थान किया। फिर वे वहा पहुच कर बालक की खोज करने लगे। वहा उन्होंने देखा की वह बालक इलुप्पा वृक्ष में विलीन हो गया। फिर वह वृक्ष निचे गिरा और वहा अनंता सयाना की मूर्ति बन गई। किन्तु यह जरुरत से ज्यादा बड़ी बन गई जिनका सर थिरुवाल्लोम में, नभी थिरुवानान्थापुर्म में और उनके चरण कमल थ्रिप्पदापुरम में और जिनकी लंबाई कुछ 8 मिल्स बन गई। पंडित जीने भगवान विष्णु जी से प्रार्थना की और उन्हें अपना रूप छोटा करने को कहा। उसी क्षण भगवान जी ने अपने आप को 3 गुणा सिकोड़ लिया वर्तमान में जिस रूप में मंदिर में विराजमान है यह वाही रूप है। किंतु भगवान पूर्ण रूप से दिखाई नही दे रहे थे क्योकि इलुप्पा वृक्ष उसमे बाधा बन गया था। पंडित ने भगवान को थिरुमुक्हम, थिरुवुदल और थ्रिप्पदम इन तीनो भागो को देखा। स्वामी ने प्रार्थना करके पद्मनाभा से माफ़ी मांगी। स्वामी ने राइस कांजी और उप्पुमंगा खोबरे के कवच के अंदर पुलाया महिला से प्राप्त कर के भगवान को अर्पण किया। जिस स्थान पर पंडित को भगवान ने दर्शन दिए कूपक्कारा पोट्टी और करुवा पोट्टी से संबंधित है। उस समय शासण कर रहे राजा और वहा के ब्राम्हणों ने साथ मिलकर मंदिर का निर्माण कार्य संभाला। कूपक्कारा पोट्टी मंदिर की तंत्री बन गई।

पद्मनाभस्वामी मंदिर के उत्तर पश्चिम में अनंथान्कदु नागराजा मंदिर स्थित है। स्वामी की समाधी पद्मनाभा मंदिर के बाहर पश्चिम में स्थित है। समाधी के ऊपर कृष्ण मंदिर है। यह मंदिर विल्वामंगालम श्री कृष्ण स्वामी के नाम से जाना जाता है। जोकि थ्रिस्सुर नादुविल मधोम से संबंधित है।

पद्मनाभस्वामी मंदिर के बारे में कुछ रोचक बाते

1. त्रवंकोरे शाही मुकुट मंदिरों में रखा है- भगवान विष्णु यहा के प्रमुख देव है पद्मनाभस्वामी मंदिर के और त्रवंकोरे के शासक भी। यह मुकुट 18 वी सदी के त्रवंकोरे के राजा का है और शाही परिवार के सदस्य उनकी और से राज करते है। यह शाही मुकुट हमेशा त्रवंकोरे मंदिर में सुरक्षित रहता है।

2. इस मंदिर का निर्माण सम्मिश्रण है द्रविड़ और देशी केरला के शैली से बना है। अगर आप ने ध्यान दिया होंगा तो करला का कोई मंदिर इतना बड़ा नही है। जिनमे से कइयो की ढलान वाली छत है। जिनकी कुछ कहानिया भी है। पद्मनाभस्वामी मंदिर निर्माण की द्रविड़ शैली से बहोत प्रभावित होते है। इस में से बहुत से मंदिर बहुत से मंदिर पास के राज्य तमिलनाडु से प्रभावित है।

3. इस मंदिर में लंबे समय से नृत्य चलता आ रहा है इसके सहारे से बिना किसी की मदद से पद्मनाभा मंदिर का खजाना दुसरे सभी खजानों से अधिक है। 2011 में इस मंदिर का तहखाना खुला जिसमे इतना धन निकला की यह मंदिर दुनिया का सबसे आमिर मंदिर बन गया। इसके पहले मुगल खजाना 90$ बिलियन का सबसे बड़ा था।

4. लक्षा दीपम त्यौहार- यह त्योहार इस मंदिर मे हर छ: साल के बाद तानुँरी में मनाया जाता है। यह इस मंदिर का सबसे बड़ा फेस्टिवल है इसमें हजारों लाखों दिये मंदिर में जलते । इसे मकंर सक्रांति के दिन मनाया जाता है। यह फेस्टिवल 12 भद्रोद एपमस का अन्न होने का संकेत देता है। इस दिन पदमनाभ, नरसिम्हा और कृष्ण की तसवीरों के साथ विशाल शोभा यात्रा निकलती है।

महत्व

मंदिर का महत्व यहाँ के पवित्र परिवेश से और बढ जाता है। मंदिर में धूप-दीप का प्रयोग एवं शंखनाद होता रहता है। मंदिर का वातावरण मनमोहक एवं सुगंधित रहता है। मंदिर में एक स्वर्णस्तंभ भी बना हुआ है जो मंदिर के सौदर्य में इजाफा करता है। मंदिर के गलियारे में अनेक स्तंभ बनाए गए हैं जिन पर सुंदर नक़्क़ाशी की गई है जो इसकी भव्यता में चार चाँद लगा देती है। मंदिर में प्रवेश के लिए पुरुषों को धोती तथा स्त्रियों को साड़ी पहनना अनिवार्य है। इस मन्दिर में हिन्दुओं को ही प्रवेश मिलता है। मंदिर में हर वर्ष ही दो महत्वपूर्ण उत्सवों का आयोजन किया जाता है जिनमें से एक मार्च एवं अप्रैल माह में और दूसरा अक्टूबर एवं नवंबर के महीने में मनाया जाता है। मंदिर के वार्षिकोत्सवों में लाखों की संख्या में श्रद्धालु भाग लेने के लिए आते हैं तथा प्रभु पद्मनाभस्वामी से सुख-शांति की कामना करते हैं।